GENETICS (आनुवांशिकी )
GENETICS (आनुवांशिकी )
- चरक सुभुत जैसे भारतीय दार्शनिकों ने भी आनुवांशिकता के तथ्यों को उद्घटित किया था।
- पाइथोगोरस अरस्तु आदि ने भी आनुवांशिकता जैसे विषय पर अपने अपने विचार प्रस्तुत किये । ग्रेगर जान मेण्डल ने अपने प्रयोगों से महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले।
- माता पिता या जनक के गुणों का अपनी सन्तान में आना आनुवांशिकता कहलाता है।
- ग्रेगर जान मेण्डल ने सन् 1865 में मटर की 34 किस्मों के 7 लक्षणों के जोड़े लेकर प्रभावी तथा अप्रभावी प्रभावों को दर्शाया। मेण्डल ने प्रयोगों को आधार बनाकर आनुवांशिकता नियमों का प्रतिपादन किया।
- मेण्डल ने आनुवांशिकता के लक्षणों के वाहक को कारक नाम दिया।
- कोशिका के केन्द्रक में पाये जाने वाले गुणसूत्र ही पैतृक लक्षणों को एक पीढी से दूसरी पीढी तक ले जाते है।
- मेण्डल के अनुसार प्रत्येक गुण एक विशिष्ट कारक के कारण होता है। आधुनिक शोध में गुणसूत्र के ऊपर कारक पाए जाते है। इस कारक को जीन कहते है। गुणसूत्र मे कारक हमेशा जोड़े में पाए जाते है।
- जो विभिन्नताएं एक पीढी से दूसरी पीढी में संचारित होती है वंशागत विभिन्नताएं कहलाती है।
- एक ही गुण के विभिन्न विरोधी रूप को प्रकट करने वाले कारकों को एक दूसरे का एलील कहते है।
- आनुवांशिक पदार्थ की डी एन ए होता है। डी एन ए की कुण्डलित रचना में इसकी प्रतिकृतिकरण की विधि निहित है।
- मनुष्य की कायिक कोशाओं में 46 अर्थात 23 जोडी गुणसूत्र होते है इनमें 22 जोडी आॅटोसोम 23 वे जोडे को हेटरोसोम्स कहते है पुरूषों में '' XY'' तथा स्त्रियों में ''XX'' लिंग गुणसूत्र होते हैं। नर में ''Y'' गुणसूत्र लिंग निर्धारण के लिए उत्तरदायी होता है।
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Reviewed by online study guru
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नवंबर 21, 2017
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